होली के दूसरे दिन यहां बरसता है खुशियों का रंग, देवर भाभी पर बरसाते डोलची

करौली में डोलची मार और कोड़े मार होली खेलने की परंपरा है, जिसमें देवर-भाभी की होली सबसे अनोखी मानी जाती है. होली के दूसरे दिन, जब पूरा गांव मंदिर के बाहर एकत्रित होता है, तब देवर अपने भाभियों के ऊपर पानी से भरी बाल्टी (जिसे डोलची कहा जाता है) उड़ेलते हैं.

होली के दूसरे दिन यहां बरसता है खुशियों का रंग, देवर भाभी पर बरसाते डोलची
करौली में डोलची मार और कोड़े मार होली खेलने की परंपरा है, जिसमें देवर-भाभी की होली सबसे अनोखी मानी जाती है. होली के दूसरे दिन, जब पूरा गांव मंदिर के बाहर एकत्रित होता है, तब देवर अपने भाभियों के ऊपर पानी से भरी बाल्टी (जिसे डोलची कहा जाता है) उड़ेलते हैं.